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फंगल संकà¥à¤°à¤®à¤£ से बचाव के लिठघरेलू उपाय
फंगल संकà¥à¤°à¤®à¤£ (Fungal infection) à¤à¤• आम पà¥à¤°à¤•ार का तà¥à¤µà¤šà¤¾ संबंधी संकà¥à¤°à¤®à¤£ होता है। मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ में, फंगल संकà¥à¤°à¤®à¤£ तब होता है जब कवक (Fungus) या फंगस शरीर के किसी कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में आकà¥à¤°à¤®à¤£ करते है और पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ इनसे लड़ने में सकà¥à¤·à¤® नहीं होती है।
फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ कà¥à¤¯à¤¾ होता है?
फंगल संकà¥à¤°à¤®à¤£ तीनों दोषों के कारण होता है। लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के आधार पर दोषों की दà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨-à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ हो सकती है। खà¥à¤œà¤²à¥€ होने पर कफ à¤à¤µà¤‚ पितà¥à¤¤ असंतà¥à¤²à¤¿à¤¤ होना, लाल होने पर कफ à¤à¤µà¤‚ पितà¥à¤¤ का असंतà¥à¤²à¤¨ और तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर सफेद चकतà¥à¤¤à¥‡ होना- वात à¤à¤µà¤‚ कफ का असंतà¥à¤²à¤¨ होने के कारण होता है।
फंगल संकà¥à¤°à¤®à¤£ à¤à¤• आम समसà¥à¤¯à¤¾ है परनà¥à¤¤à¥ अगर समय से इसका इलाज न किया जाठतो यह à¤à¤• गमà¥à¤à¥€à¤° रूप ले सकता है। फंगल संकà¥à¤°à¤®à¤£ à¤à¤²à¥‡ ही तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर पड़ने वाले लाल चकतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ जैसा होता है, परनà¥à¤¤à¥ इसका पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ काफी खतरनाक साबित हो सकता है। यह रोग सिरà¥à¤« तà¥à¤µà¤šà¤¾ तक ही सीमित नहीं होता है बलà¥à¤•ि यह ऊतक, हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और शरीर के सà¤à¥€ अंगों को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ रखता है।
फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ नवजात से वृदà¥à¤§à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ तक किसी à¤à¥€ अवसà¥à¤¥à¤¾ में हो सकता है।
फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने के कà¥à¤¯à¤¾ लकà¥à¤·à¤£ होते हैं? (Symptoms of Fungal Infection)
वैसे तो
फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने के कारण
फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने के बहà¥à¤¤ सारे कारण होते हैं, जो फंगस के पनपने या बढ़ने के वजह बन जाते हैं-
-कमजोर पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ à¤à¥€ फंगल संकà¥à¤°à¤®à¤£ का कारण बनती है।
-जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° गरà¥à¤®, नम वातावरण तथा नम तà¥à¤µà¤šà¤¾ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° इस संकà¥à¤°à¤®à¤£ के होने का पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारण होते है।
-à¤à¤¡à¥à¤¸, à¤à¤š.आई.वी संकà¥à¤°à¤®à¤£, कैंसर, मधà¥à¤®à¥‡à¤¹ जैसी बीमारियाठà¤à¥€ फंगल संकà¥à¤°à¤®à¤£ का कारण बनती है।
-जो लोग à¤à¤• फंगल संकà¥à¤°à¤®à¤£ (Fungal infection) से पीड़ित वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ से संपरà¥à¤• में आते हैं, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ संकà¥à¤°à¤®à¤£ हो सकता है।
-अधिक वजन और मोटापा à¤à¥€ इसका à¤à¤• कारण बन सकता है। जांघों पर अतिरिकà¥à¤¤ चरà¥à¤¬à¥€, नियमित और लंबे समय तक साईकिल चलाने या जॉगिंग करने से इस हिसà¥à¤¸à¥‡ में अतिरिकà¥à¤¤ नमी और रगड़ होने लगती है। लगातार इस रगड़ से तà¥à¤µà¤šà¤¾ में रैशेज हो सकते हैं। इससे फंगल और अनà¥à¤¯ संकà¥à¤°à¤®à¤£ हो सकते हैं।
-अधिक पसीना, फंगस के बढ़ने का कारण हो सकते हैं।
-आनà¥à¤µà¤¾à¤‚शिकी कारक या फंगल संकà¥à¤°à¤®à¤£ (Fungal infection) का पारिवारिक इतिहास à¤à¥€ इस संकà¥à¤°à¤®à¤£ का पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारण होता है।
-महिलाओं को सेनेटरी पैड से à¤à¥€ जांघों के आस-पास संकà¥à¤°à¤®à¤£ हो सकता है।
-पाउडर, डियोडà¥à¤°à¥‡à¤‚ट, कपड़ा धोने के लिठइसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² होने वाले डिटरà¥à¤œà¥‡à¤‚ट पाउडर के à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के कारण à¤à¥€ जांघों के बीच के गà¥à¤°à¥‹à¤‡à¤¨ à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में रैशेज हो सकते हैं।
-कई बार बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को नैपी रैशज़ हो जाते हैं। जब बचà¥à¤šà¤¾ अधिक समय तक गीली नैपी पैड के संपरà¥à¤• में रहता है, तो उसे à¤à¤¸à¥€ परेशानी हो सकती है।
-आमतौर पर मानसून के दौरान फंगल पैदा करने वले जीवाणॠकई गà¥à¤¨à¤¾ तेजी से फैलते हैं। आमतौर पर शरीर के नजर अंदाज किठगठअंगों जैसे पैर की अंगà¥à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के आगे का à¤à¤¾à¤—, अंगà¥à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के आगे का à¤à¤¾à¤—, अंगà¥à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ आदि के बीच, कमर का निचला हिसà¥à¤¸à¤¾, जहाठये संकà¥à¤°à¤®à¤£ बहà¥à¤¤ अधिक तेज़ी से होता है। मानसून के दौरान लोग हलà¥à¤•ी बूंदा-बांदी में à¤à¥€à¤—ने के बाद अकà¥à¤¸à¤° तà¥à¤µà¤šà¤¾ को गीला छोड़ देते हैं। यही छोटी-सी असावधानी कई बार फंगल से संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ होने का कारण बन जाती है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि नमी में बढ़ता है तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर फफूंद संकà¥à¤°à¤®à¤£ यानि बरसाती मौसम, उमस और नमी à¤à¤°à¥‡ वातावरण में फंगस का आकà¥à¤°à¤®à¤£ बढ़ जाता है। यही कारण है कि इन दिनों अधिकतर लोग फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ का शिकार होते हैं। इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® यानि रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¥€ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ का कमजोर होना-सà¥à¤•िन इंफेकà¥à¤¶à¤¨ की बड़ी वजह होती है। इस मामले में तà¥à¤µà¤šà¤¾ संकà¥à¤°à¤®à¤£ का जोखिम जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बढ़ जाता है। जून, जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ और अगसà¥à¤¤ के महीने के दौरान यह समसà¥à¤¯à¤¾ काफी बढ़ जाती है।
फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से बचने के उपाय
फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के समसà¥à¤¯à¤¾ से बचने के लिठसबसे पहले जीवनशैली और आहार में बदलाव लाने की ज़रूरत होती है-
-मानसून में फंगल संकà¥à¤°à¤®à¤£ अधिक होता है।
-तà¥à¤µà¤šà¤¾ को सूखा और सà¥à¤µà¤šà¥à¤› रखे।
-सूती कपड़े पहने।
-बरसात में बालों को गीला न रहने दे।
-पानी परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में पीयें ताकि तà¥à¤µà¤šà¤¾ सूखी न रखे।
-फंगल संकà¥à¤°à¤®à¤£ की नवीन अवसà¥à¤¥à¤¾ में à¤à¤²à¥‹à¤ªà¥ˆà¤¥à¤¿à¤• उपचार बेहतर परिणाम देते हैं परनà¥à¤¤à¥ अगर à¤à¤²à¥‹à¤ªà¥ˆà¤¥à¤¿à¤• उपचार से संकà¥à¤°à¤®à¤£ ठीक न हो तो आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• उपचार जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ फायदेमंद साबित हो सकता है।
फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से बचने के उपाय
सामानà¥à¤¯à¤¤à¤ƒ फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ की समसà¥à¤¯à¤¾ से निजात पाने के लिठसबसे पहले घरेलू नà¥à¤¸à¥à¤–़ों को ही अपनाया जाता है। यहां हम पतंजली के विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पारित कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ घरेलू उपायों के बारे में बात करेंगे जिनके पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— से इंफेकà¥à¤¶à¤¨ की समसà¥à¤¯à¤¾ को कà¥à¤› हद तक राहत पाया जा सकता है-
हलà¥à¤¦à¥€ फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से राहत दिलाने में फायदेमंद
हलà¥à¤¦à¥€ में à¤à¤‚टीफंगल गà¥à¤£ होते हैं, इसलिठइसके पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— से à¤à¥€ फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ ठीक हो जाते हैं। इसके लिठआप इंफेकà¥à¤¶à¤¨ वाली जगह पर कचà¥à¤šà¥€ हलà¥à¤¦à¥€ को पीसकर लगा सकते हैं। अगर कचà¥à¤šà¥€ हलà¥à¤¦à¥€ उपलबà¥à¤§ नहीं है तो आप हलà¥à¤¦à¥€ पाउडर को थोड़े से पानी के साथ मिलाकर इसका गाढ़ा पेसà¥à¤Ÿ बनाकर इसे à¤à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ जगह पर लगा सकते हैं। हलà¥à¤¦à¥€ के पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— से इंफेकà¥à¤¶à¤¨ की वजह से होने वाले दाग-धबà¥à¤¬à¥‡ à¤à¥€ मिट जाते हैं।
नीम फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से राहत दिलाने में फायदेमंद
नीम तà¥à¤µà¤šà¤¾ के किसी à¤à¥€ तरह के संकà¥à¤°à¤®à¤£ को रोकने में लाà¤à¤•ारी होता है। नीम के पानी या नीम की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को पानी में उबालकर इस पानी का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— दिन में कई बार तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर करने से फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से राहत मिलती है।
पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¤¾ फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ को ठीक करने में लाà¤à¤•ारी
पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ में इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ को नषà¥à¤Ÿ करने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ होती है। पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को पीसकर पेसà¥à¤Ÿ बना लें। इस पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ के पेसà¥à¤Ÿ को तà¥à¤µà¤šà¤¾ में लगा कर इसे 1 घणà¥à¤Ÿà¥‡ तक रहने दे फिर निकाल दें।
कपूर फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से राहत दिलाने में फायदेमंद
केरोसिन के तेल में 5 गà¥à¤°à¤¾à¤® कपूर और 1 गà¥à¤°à¤¾à¤® नेपà¥à¤¥à¤²à¥€à¤¨ को मिला लें। इसे संकà¥à¤°à¤®à¤£ वाली जगह पर कà¥à¤› देर मलहम की तरह लगा कर छोड़ दें। जब तक रोग ठीक न हो जाये, इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को दिन में दो बार दोहराये।
टी टà¥à¤°à¥€ ऑयल फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ को ठीक करने में लाà¤à¤•ारी
टी टà¥à¤°à¥€ ऑयल में à¤à¤‚टी-बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤² गà¥à¤£ पाठजाते हैं। तà¥à¤µà¤šà¤¾ संकà¥à¤°à¤®à¤£ को दूर करने के लिठटी टà¥à¤°à¥€ ऑयल को सीधे पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हिसà¥à¤¸à¥‡ में रोजाना दो बार लगायें।
पीपल की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से राहत दिलाने में फायदेमंद
पीपल की पतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को थोड़े पानी के साथ उबाल लें। इसे ठणà¥à¤¡à¤¾ होने दें और इस पानी का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— तà¥à¤µà¤šà¤¾ को धोने के लिठकरें। इससे घाव जलà¥à¤¦à¥€ ठीक होने लगते हैं।
लहसà¥à¤¨ फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से राहत दिलाने में फायदेमंद
लहसà¥à¤¨ में à¤à¤‚टी फंगल गà¥à¤£ मौजूद होते हैं इसलिठखाने में लहसà¥à¤¨ के पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— से फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ का खतरा कम हो जाता है। लहसà¥à¤¨ के पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— के लिठआप लहसà¥à¤¨ की 3-4 कलियों को पीस लें और इसके पेसà¥à¤Ÿ को इंफेकà¥à¤¶à¤¨ वाली जगह पर लगाà¤à¤‚। अगर आपने इंफेकà¥à¤¶à¤¨ वाली जगह को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खà¥à¤œà¤²à¤¾à¤¯à¤¾ है तो लहसà¥à¤¨ लगाने से à¤à¤• मिनट हलà¥à¤•ी-सी जलन हो सकती है लेकिन इससे ये इंफेकà¥à¤¶à¤¨ धीरे-धीरे ठीक होने लगता है।
जैतून का तेल फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से राहत दिलाने में फायदेमंद
जैतून का तेल काफी गà¥à¤£à¤•ारी होता है लेकिन पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ में à¤à¥€ कई गà¥à¤£ होते हैं। फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ को ठीक करने के लिठजैतून के 5-6 पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ को पीसकर इसका पेसà¥à¤Ÿ बना लें और इसे इंफेकà¥à¤¶à¤¨ वाली जगह पर लगा लें। इस पेसà¥à¤Ÿ को तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर आधे घणà¥à¤Ÿà¥‡ लगा रहने दें इसके बाद धो लें।
à¤à¤²à¥‹à¤µà¥‡à¤°à¤¾ जेल फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से राहत दिलाने में फायदेमंद
फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ में à¤à¤²à¥‹à¤µà¥‡à¤°à¤¾ जेल के पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— से राहत मिल सकती है, लेकिन इसके लिठताजा तोड़े गठपतà¥à¤¤à¥‡ का जेल अचà¥à¤›à¤¾ होता है। इसके लिठआप à¤à¤²à¥‹à¤µà¥‡à¤°à¤¾ के ताजे पतà¥à¤¤à¥‡ को तोड़कर इसे बीच से वरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल काट लें और जेल वाले हिसà¥à¤¸à¥‡ को तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर सीधे रगड़ें। रगड़ने के बाद बचे हà¥à¤ रेशों को तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर 30 मिनट तक रहने दें फिर गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¥‡ पानी से धो लें।
दही फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से राहत दिलाने में फायदेमंद
दही में à¤à¤¸à¤¿à¤¡ होता है जो हानिकारक बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को मार देता है। हालांकि दही में खà¥à¤¦ à¤à¥€ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ होते हैं लेकिन वह बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ हमारे शरीर को कोई नà¥à¤•सान नहीं पहà¥à¤‚चाते हैं। फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के लिठआप दही को इंफेकà¥à¤¶à¤¨ वाली जगह पर कॉटन की सहायता से लगाà¤à¤‚ और मसाज करें। à¤à¤• बात का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि, इंफेकà¥à¤¶à¤¨ वाली जगह को कà¤à¥€ à¤à¥€ हाथों से न छà¥à¤à¤‚ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि ये इंफेकà¥à¤¶à¤¨ संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• होता है।
टी ऑयल फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से राहत दिलाने में फायदेमंद
-चाय के पेड़ के तेल में पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक à¤à¤‚टीफंगल यौगिक होते हैं जो फंगल को मारने में मदद करते हैं जो फंगल संकà¥à¤°à¤®à¤£ का कारण बनता है। इसके अलावा, इसके à¤à¤‚टीसेपà¥à¤Ÿà¤¿à¤• गà¥à¤£ अनà¥à¤¯ शरीर के अंगों में संकà¥à¤°à¤®à¤£ के फैलाव को रोकते हैं।
-शà¥à¤¦à¥à¤§ चाय के पेड़ के तेल और जैतून का तेल या मीठे बादाम के तेल को बराबर मातà¥à¤°à¤¾ में मिलाà¤à¤‚। दिन में कई बार तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर लगाने से संकà¥à¤°à¤®à¤£ से राहत मिलता है।
-आप चाय के पेड़ के तेल के तीन हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ और मà¥à¤¸à¤¬à¥à¤¬à¤° वेरा जेल के à¤à¤• हिसà¥à¤¸à¥‡ के साथ मिशà¥à¤°à¤£ à¤à¥€ तैयार कर सकते हैं। दिन में दो बार संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में मिशà¥à¤°à¤£ को रगड़ें।
-योनि संकà¥à¤°à¤®à¤£ के लिà¤, à¤à¤• टैमà¥à¤ªà¤¨ पर चाय के पेड़ के तेल की कà¥à¤› बूंदें रखें और इसे योनि में दो से तीन घणà¥à¤Ÿà¥‡ तक डालें। पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ दो बार दोहराà¤à¤‚।
नारियल तेल फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से राहत दिलाने में फायदेमंद
-मधà¥à¤¯à¤®-शृंखला फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ की उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के कारण नारियल का तेल किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार के फंगल संकà¥à¤°à¤®à¤£ के लिठà¤à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ उपाय के रूप में काम करता है। संकà¥à¤°à¤®à¤£ के लिठजिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° फंगल को मारने के लिठये फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक फंगसाइड के रूप में काम करते हैं।
-धीरे-धीरे पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° पर नारियल का तेल लगायें और इसे अपने आप सूखने दें। जब तक संकà¥à¤°à¤®à¤£ साफ नहीं हो जाता तब दो या तीन बार दोहराà¤à¤‚।
-नारियल के तेल और दालचीनी के तेल की बराबर मातà¥à¤°à¤¾ में मिलाà¤à¤‚ और पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° पर इसे लागू करें। संकà¥à¤°à¤®à¤£ के विकास को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने के लिठपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ दो बार इस उपाय का पालन करें।
-योनि संकà¥à¤°à¤®à¤£ के लिà¤, जैविक नारियल के तेल में à¤à¤• टैमà¥à¤ªà¤¨ à¤à¥‚नें और योनि में डालें। इसे दो घंटों तक छोड़ दें। टैमà¥à¤ªà¤¨ को हटाने के बाद, गरà¥à¤® पानी के साथ तà¥à¤µà¤šà¤¾ के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ जगह को अचà¥à¤›à¥€ तरह से कà¥à¤²à¥à¤²à¤¾à¤à¤‚। संकà¥à¤°à¤®à¤£ समापà¥à¤¤ होने तक पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को दो बार दोहराà¤à¤‚।
चाय फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से राहत दिलाने में फायदेमंद
-चाय में टैनिन फंगल संकà¥à¤°à¤®à¤£ के लिठफंगल को नषà¥à¤Ÿ करने में मदद करते हैं। इसके अलावा, चाय में à¤à¤‚टीबायोटिक और असà¥à¤¥à¤¿à¤° गà¥à¤£ होते हैं जो फंगल संकà¥à¤°à¤®à¤£, सूजन और तà¥à¤µà¤šà¤¾ की जलन जैसे फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ से छà¥à¤Ÿà¤•ारा पाने में मदद करते हैं।
-गरà¥à¤® पानी में कà¥à¤› चाय बैग 10 मिनट के लिठà¤à¤¿à¤—ो दें। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पानी से हटा दें और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ 30 मिनट के लिठरेफà¥à¤°à¤¿à¤œà¤°à¥‡à¤Ÿà¤° में रखें। पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ जगह पर ठणà¥à¤¡à¥‡ चाय के बैग तब तक लगायें जब तक संकà¥à¤°à¤®à¤£ पूरी तरह से साफ नहीं हो जाता है। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को तीन बार दोहराà¤à¤‚।
-टोनेल फंगस या à¤à¤¥à¤²à¥€à¤Ÿ के पैर के लिà¤, पाà¤à¤š मिनट के लिठउबलते पानी के चार कप में पांच काले चाय के बैग खड़े करें। पानी को ठणà¥à¤¡à¤¾ होने दें और फिर 30 मिनट तक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ पैर को à¤à¤¿à¤—ो दें। पाà¤à¤š से छ सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के लिठपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ दो बार दोहराà¤à¤‚।
जैतून का पतà¥à¤¤à¤¾ फंगल इंफेकà¥à¤¶à¤¨ में लाà¤à¤•ारी
-जैतून के पतà¥à¤¤à¥‡ में à¤à¤‚टीफंगल और साथ ही à¤à¤‚टीमाइकà¥à¤°à¥‹à¤¬à¥‰à¤¯à¤² गà¥à¤£ होते हैं जो कवक या फंगस को खतà¥à¤® करने में मदद करते हैं। इसके अलावा, यह पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ को मजबूत बनाता है, जिससे इंफेकà¥à¤¶à¤¨ से राहत पाने में आसानी होती है।
-पेसà¥à¤Ÿ बनाने के लिठकà¥à¤› जैतून के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ को पीस लें। पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° पर सीधे इसे लगायें। इसे 30 मिनट तक छोड़ दें। संकà¥à¤°à¤®à¤£ समापà¥à¤¤ होने तक रोजाना à¤à¤• या दो बार इस उपाय का पालन करें।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास कब जाना चाहिठ?
महिलाओं को बà¥à¤–ार होने पर, ठणà¥à¤¡ लगने पर, उलà¥à¤Ÿà¥€ और मतली होने पर, अगर मà¥à¤– से खाने में परेशानी हो या पेट में दरà¥à¤¦ हो या फिर योनि से सà¥à¤°à¤¾à¤µ हो उस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ डॉकà¥à¤Ÿà¤° से समà¥à¤ªà¤°à¥à¤• करना चाहिà¤à¥¤
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